कुछ झूठे कुछ सच्चे, कुछ आधे कुछ अधूरे
कुछ जिंदा कुछ मुर्दा, कुछ कच्चे कुछ पक्के..
हर याद-ए- जख्म को ताजा कर दिया करती है यह किताबें ॥

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